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लज़्ज़त-ए-नग़्मा कहाँ मुर्ग़-ए-ख़ुश-अलहाँ के लिए
आह उस बाग़ में करता है नफ़स कोताही

Where is the pleasure of the melody for the fragrant hen, That in that garden causes the breath to falter?

अल्लामा इक़बाल
अर्थ

सुगंधित मुर्गी के लिए मधुर राग का आनंद कहाँ है, कि उस बाग में साँस अटक जाती है।

विस्तार

यह शेर, जो अल्लामा इकबाल साहब का है, असल में सच्चे एहसास और दिखावे के बीच का फर्क बताता है। शायर कहते हैं कि क्या यह नज़्म की मिठास सिर्फ़ किसी साधारण 'मुर्ग़' के लिए है? नहीं! असली कहानी तो उस बाग़ में घट रही है, जहाँ साँसें ही थम जाती हैं। यह एक गहरा एहसास है कि सबसे बड़ी बातें हमेशा साफ़ नज़र नहीं आतीं।

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