मर्द-ए-दरवेश का सरमाया है आज़ादी ओ मर्ग — अल्लामा इक़बाल

मर्द-ए-दरवेश का सरमाया है आज़ादी ओ मर्ग है किसी और की ख़ातिर ये निसाब-ए-ज़र-ओ-सीम

“The treasure of the dervish-like man is freedom and death; This collection of gold and chains is for someone else.”

— अल्लामा इक़बाल

अर्थ

दरवेश जैसे व्यक्ति की दौलत आज़ादी और मौत है; किसी और के लिए यह सोने और ज़ंजीरों का संग्रह है।

विस्तार

यह शेर दरवेश, यानी उस सच्चे मुसाफ़िर की बात करता है जिसका सरमाया कुछ और है। शायर कहते हैं कि दरवेश के लिए सबसे बड़ी दौलत सिर्फ़ आज़ादी और मौत का इकरार है। वो सोने-चांदी और ज़ंजीरों का जो बंधन है न.... वो किसी और के लिए है! यह जीवन की मोह-माया और सांसारिक बंधनों से आज़ादी की बात है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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