ताज़ा फिर दानिश-ए-हाज़िर ने किया सेहर-ए-क़दीम — अल्लामा इक़बाल

ताज़ा फिर दानिश-ए-हाज़िर ने किया सेहर-ए-क़दीम गुज़र इस अहद में मुमकिन नहीं बे-चोब-ए-कलीम

“The fresh wisdom of the present has made the dawn of antiquity, Impossible to pass through in this era without the pen of the poet.”

— अल्लामा इक़बाल

अर्थ

ताज़ा ज्ञान की समझ ने प्राचीन सुबह को गुज़ारना, इस युग में कवि की कलम के बिना असंभव कर दिया है।

विस्तार

ये शेर हमें वक़्त के चक्र और ज्ञान की निरंतरता के बारे में बताता है। शायर कहते हैं कि आज की ताज़ा समझ भी, आख़िरकार, पुरानी, सदियों पुरानी सच्चाईयों को ही जगा रही है। यानी, कोई भी दौर, किसी न किसी शाश्वत सत्य से जुड़ा होता है। और दूसरी लाइन में एक गहरा संदेश है: इस ज़माने में गुज़रना... सिर्फ़ बिना किसी मार्गदर्शन के, नामुमकिन है! हमें हमेशा उस 'क़लम' की रौशनी का सहारा लेना पड़ता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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