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मिरे कदू को ग़नीमत समझ कि बादा-ए-नाब
न मदरसे में है बाक़ी न ख़ानक़ाह में है

You considered my body a boon, like a fresh breeze, Neither in the madrasa remains, nor in the khanqah.

अल्लामा इक़बाल
अर्थ

मेरे कदू को ग़नीमत समझ कि बादा-ए-नाब। न मदरसे में है बाक़ी न ख़ानक़ाह में है।

विस्तार

यह शेर हमें बताता है कि हमारा अस्तित्व किसी संस्था या जगह से बंधा नहीं है। शायर कहते हैं कि मेरी मौजूदगी को एक नेमत समझना चाहिए, क्योंकि न मुझे मदरसे में रखा गया है, और न ही मुझे खानक़ाह में। यह पंक्तियाँ आत्म-सम्मान और स्वतंत्रता की बात करती हैं।

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