न हो तुग़्यान-ए-मुश्ताक़ी तो मैं रहता नहीं बाक़ी
कि मेरी ज़िंदगी क्या है यही तुग़्यान-ए-मुश्ताक़ी
“If not the stream of yearning, I cannot survive; / For what is my life but this stream of yearning?”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
यदि उत्कट लालसा की धारा न हो, तो मैं शेष नहीं रह सकता; क्योंकि मेरा जीवन यही उत्कट लालसा की धारा है।
विस्तार
यह शेर एक बहुत गहरा एहसास है, जो बताता है कि शायर की ज़िन्दगी का वजूद ही उसकी चाहत में है। 'तुग़यां-ए-मुश्ताक़ी' सिर्फ़ एक भावना नहीं है, बल्कि शायर का जीवन आधार है। वह कहते हैं कि इस जलन या तड़प के बिना, मेरी ज़िंदगी का क्या मोल होगा?... यह एक जुनून भरी गुहार है कि चाहत ही जीवन का सबसे बड़ा स्रोत है!
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