उसी 'इक़बाल' की मैं जुस्तुजू करता रहा बरसों — अल्लामा इक़बाल

उसी 'इक़बाल' की मैं जुस्तुजू करता रहा बरसों बड़ी मुद्दत के बा'द आख़िर वो शाहीं ज़ेर-ए-दाम आया

“For years, I kept searching for 'Iqbal', And after a long time, he finally came under the roof.”

— अल्लामा इक़बाल

अर्थ

मैं वर्षों तक उसी 'इक़बाल' को खोजता रहा, और बहुत समय बाद आख़िरकार वह छत के नीचे आ गया।

विस्तार

यह शेर लगातार तड़प और किसी गहरी चाहत के पूरे होने की बात करता है। शायर कहते हैं कि वह बरसों से किसी 'इक़बाल' को खोज रहे थे। 'शाहीं ज़ेर-ए-दाम' का मतलब है कोई बहुत बड़ा, शाही और सुरक्षित सहारा। यह उस एहसास को बयां करता है जब आप बहुत मुश्किलों से गुज़रते हैं, और आखिरकार उस सुकून या मार्गदर्शन को पा लेते हैं जिसकी आप तलाश कर रहे थे।

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