दिया 'इक़बाल' ने हिन्दी मुसलमानों को सोज़ अपना
ये इक मर्द-ए-तन-आसाँ था तन-आसानों के काम आया
“Iqbal gave sorrow to Hindi Muslims, a man who was easy in body, was useful to the easy-bodied.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
इक़बाल ने हिन्दी मुसलमानों को अपना दुख दिया, यह एक ऐसा पुरुष था जो शारीरिक रूप से आसान था और आसान लोगों के काम आया।
विस्तार
इक़बाल साहब का यह शेर, इश्क़ और जुनून की हकीकत पर एक गहरा तंज़ है। शायर कह रहे हैं कि जो 'सोज़' या जुनून उन्होंने दिया, वो किसी गहरी चीज़ के लिए नहीं था। बल्कि, वो किसी ऐसे शख़्स के लिए था, जो बहुत आसान था, और सिर्फ़ उन लोगों के काम आया जो आसानी से उपलब्ध हो जाते थे। यह एक तरह से भावनाओं की सरलता पर सवाल उठाना है।
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