मुझे ये डर है मुक़ामिर हैं पुख़्ता-कार बहुत — अल्लामा इक़बाल
मुझे ये डर है मुक़ामिर हैं पुख़्ता-कार बहुत
न रंग लाए कहीं तेरे हाथ की ख़ामी
“I fear that the stages are very strong and stable, Lest the flaw in your hand brings no color (or joy).”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
मुझे डर है कि मंच बहुत मजबूत हैं, कहीं तेरे हाथ की कमी से कोई रंग न आ जाए।
विस्तार
शायर यहाँ एक गहरे डर को बयां कर रहे हैं। वह कहते हैं कि माहौल या स्थिति तो बहुत मज़बूत है, पर उन्हें यह चिंता है कि कहीं आपके हाथ की कोई छोटी सी कमी... उस पूरे रंग को फीका न कर दे। यह प्रेम में एक बहुत ही नाज़ुक एहसास है, जहाँ सब कुछ परफेक्ट लग रहा है, फिर भी एक अनिश्चितता बनी रहती है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
ऑडियो
पाठ
हिंदी अर्थ
अंग्रेज़ी अर्थ
हिंदी विस्तार
अंग्रेज़ी विस्तार
Comments · 0
Free — just your email. You'll come right back here.
No comments yet. Be the first.
