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हक़ीक़त-ए-अबदी है मक़ाम-ए-शब्बीरी
बदलते रहते हैं अंदाज़-ए-कूफ़ी ओ शामी

The reality of the self is the station of the lover, The styles of the Kufi and the Shammi keep changing.

अल्लामा इक़बाल
अर्थ

स्वयं की वास्तविकता ही प्रेमी का स्थान है, कफी और शामी के अंदाज़ बदलते रहते हैं।

विस्तार

यह शेर हमें ज़िंदगी की दो बड़ी सच्चाइयों के बारे में बताता है—एक है शाश्वत सत्य, और दूसरी है बदलता हुआ समय। शायर कहते हैं कि असली हक़ीक़त तो रूह के उस नशे में है, जिसे हम 'शब्बीरी' कहते हैं। और ये दुनिया... ये दुनिया के अंदाज़, ये शैलियाँ... ये सब बस बदलते रहते हैं। इसका मतलब है कि हमें हमेशा सतही बदलावों पर ध्यान नहीं देना चाहिए।

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