इश्क़-ए-बुताँ से हाथ उठा अपनी ख़ुदी में डूब जा
नक़्श ओ निगार-ए-दैर में ख़ून-ए-जिगर न कर तलफ़
“From the love of the mountains, raise your hand, drown yourself in your own being; do not let the blood of your heart be spilled in the traces of the saintly beauty.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
इश्क़-ए-बुताँ (पहाड़ों के प्रेम) से हाथ उठा, अपनी ख़ुदी में डूब जा; नक़्श ओ निगार-ए-दैर में अपने दिल का खून मत बहा।
विस्तार
यह शेर एक गहरा फ़लसफ़ा है। शायर हमें सिखा रहे हैं कि हमें दुनियावी इश्क़ और बाहरी मोह-माया के रिश्ते छोड़ देने चाहिए। हमें अपनी आंतरिक ख़ुदी में गोते लगाना होगा। उनका कहना है कि जब आप रूहानी सफ़र पर हों, तो अपने दिल के खून-ए-जिगर को किसी बाहरी बात पर बर्बाद न करें। यह स्वयं की पहचान और आत्म-मंथन का एक अद्भुत संदेश है।
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