ये फ़ैज़ान-ए-नज़र था या कि मकतब की करामत थी
सिखाए किस ने इस्माईल को आदाब-ए-फ़रज़ंदी
“Was it the favor of your gaze, or was it the grace of the academy? Who taught Ismail the manners of a son?”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
यह नज़र का फ़ैज़ान था या मकतब की करामत; किसने इस्माईल को फ़रज़ंदी के आदाब सिखाए।
विस्तार
यह शेर ज्ञान और कृपा के स्रोत पर गहरा विचार करता है। अल्लामा इकबाल सवाल करते हैं कि क्या इस्माइल को जो अद्भुत ज्ञान मिला, वह सिर्फ़ एक नज़र का फ़ैज़ था, या फिर वह मक़तब की कोई वास्तविक करामत थी। वह पूछते हैं कि इस्माइल को फ़रज़ंदी के आदाब (विनम्रता) किसने सिखाए—यह दर्शाता है कि ऐसे गहरे गुण किसी मानवीय शिक्षा से कहीं ऊपर होते हैं।
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