गुज़र-औक़ात कर लेता है ये कोह ओ बयाबाँ में
कि शाहीं के लिए ज़िल्लत है कार-ए-आशियाँ-बंदी
“It passes through the mountains and the desert so easily, That for the royal household, the act of cage-making is a disgrace.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
यह पर्वत और रेगिस्तान में आसानी से गुज़र जाता है, कि शाही खानदान के लिए पिंजरा बनाना एक अपमान है।
विस्तार
यह शेर आज़ादी और ज़िम्मेदारियों के बीच के टकराव को दिखाता है। शायर कहते हैं कि वो पहाड़ों और रेगिस्तान जैसे कठोर माहौल में भी गुज़ारा कर सकते हैं। लेकिन उनके लिए, 'आशियाँ-बंदी'—यानी घर में बस जाना—किसी राजा के लिए एक अपमान है। यह पंक्तियाँ बताती हैं कि उनकी पहचान और इज़्ज़त, किसी भी घरेलू सुख से ज़्यादा कीमती है।
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