बढ़ के ख़ैबर से है ये मारका-ए-दीन-ओ-वतन
इस ज़माने में कोई हैदर-ए-कर्रार भी है
“From the city of Khairbourg, this assault on faith and homeland, In this era, is there anyone like the Lion of Courage?”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
खैबर से यह धर्म और वतन पर हमला इतना बढ़ गया है कि इस ज़माने में कोई बहादुर और साहसी व्यक्ति नहीं है।
विस्तार
यह शेर एक बहुत बड़े संघर्ष की बात करता है—धर्म और वतन के लिए की जा रही जंग। अल्लामा इकबाल जी कहते हैं, एक गहरी चिंता के साथ, कि क्या इस ज़माने में कोई ऐसा है जो हैदर जैसी हिम्मत और ताक़त रखता हो। यह एक ज़बरदस्त चुनौती है, जो हर पीढ़ी से पूछती है कि सिद्धांतों और वतन के सच्चे रक्षक कहाँ हैं।
