“Let someone ask what loss the preacher would bear, if upon the deedless too that Self-Sufficient Lord bestows His grace.”
कोई उस उपदेशक (वाइज़) से पूछे कि उसका क्या बिगड़ जाएगा, अगर वह बेपरवाह ख़ुदा किसी कर्महीन व्यक्ति पर भी अपनी रहमत बरसा दे।
इस शेर में शायर धर्म के ठेकेदारों और उपदेशकों (वाइज़) की संकीर्ण सोच पर बड़ी नफ़ासत से चोट करता है। खुदा 'बे-नियाज़' है, यानी वह किसी हिसाब-किताब का मोहताज नहीं और उसकी रहमत असीम है। शायर पूछता है कि अगर वह मेहरबान रब किसी कर्महीन या गुनहगार इंसान को भी अपनी दया से नवाज़ दे, तो इसमें उपदेशक का क्या नुकसान हो जाएगा? यह शेर खुदा की बेपनाह मोहब्बत और इंसान की संकीर्णता के फर्क को बयां करता है।
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