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की हक़ से फ़रिश्तों ने 'इक़बाल' की ग़म्माज़ी
गुस्ताख़ है करता है फ़ितरत की हिना-बंदी

By right, the angels have Iqbal’s fondness; / The impudent one dares to bind nature's disposition.

अल्लामा इक़बाल
अर्थ

हक़ से फ़रिश्तों ने 'इक़बाल' की ग़म्माज़ी; / गुस्ताख़ है करता है फ़ितरत की हिना-बंदी।

विस्तार

यह शेर इंसान की अपनी रूह और उसकी आज़ादी के बारे में है। शायर कहते हैं कि चाहे फ़रिश्तों को ही अपनी हक़ से ग़म्माज़ी करनी पड़ी हो.... लेकिन सबसे बड़ा गुनाह, सबसे बड़ी गुस्ताख़ी.... वह है अपनी फ़ितरत को क़ैद करने की कोशिश करना! यह हमें याद दिलाता है कि हमें हमेशा अपने अंदर के उस सच्चे अहसास को ज़िंदा रखना चाहिए, किसी भी बंधन में नहीं।

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