ख़ुदी में डूबते हैं फिर उभर भी आते हैं
मगर ये हौसला-ए-मर्द-ए-हेच-कारा नहीं
“They drown in their own being, yet they rise again, But this is not the courage of a warrior-like man.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
ख़ुदी में डूबकर फिर उठते हैं, लेकिन यह किसी योद्धा जैसे मर्द का हौसला नहीं है।
विस्तार
यह शेर जीवन के संघर्ष और आत्म-खोज के चक्र को दर्शाता है। इकबाल जी कहते हैं कि इंसान में खुद को संभालने की शक्ति तो होती है—गिरकर फिर उठने की हिम्मत तो होती है। लेकिन असली मर्द का हौसला.... वो सिर्फ़ गिरने और उठने तक सीमित नहीं होता। वो तो हर चुनौती का सामना करने का जज़्बा होता है!
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