नवा-ए-सुब्ह-गाही ने जिगर ख़ूँ कर दिया मेरा
ख़ुदाया जिस ख़ता की ये सज़ा है वो ख़ता क्या है
“The gentle breeze of the new morning has stained my heart with blood; Oh God, what is this sin for which this punishment is given?”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
नवा-ए-सुब्ह-गाही ने मेरे जिगर को खून कर दिया है; हे खुदा, जिस गुनाह की यह सज़ा है, वह गुनाह क्या है।
विस्तार
यह शेर उस दर्द को बयां करता है जो किसी वजह के बिना होता है। शायर कहते हैं कि सुबह की नई, खूबसूरत रौनक ने उनके दिल को लहूलुहान कर दिया है। वह ख़ुदा से सवाल कर रहे हैं कि आखिर किस गुनाह की सज़ा है ये! यह एक ऐसा सवाल है जो हर उस इंसान के दिल में होता है जो बेवजह के ग़म से गुज़र रहा होता है।
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