“O awaited truth, reveal yourself from the veil of metaphor, For thousands of salutations yearn upon my devoted brow.”
हे प्रतीक्षित सत्य, कभी तो रूपक के आवरण से प्रकट हो जाओ। क्योंकि मेरे भक्तिपूर्ण माथे पर हजारों सज्दे (प्रणाम) करने को तड़प रहे हैं।
यह शेर उस गहरी तड़प को बयां करता है, जो हर इंसान को 'सत्य' से होती है। शायर कहते हैं कि जिसे हम सच मानते हैं, वो अक्सर रूपक या किसी आवरण में छिपा होता है। आप अपनी भक्ति में इतनी डूब जाते हैं.... कि आपको लगता है कि हर पल, हर सज्दा, उस सत्य को पाने की बेचैनी है। यह इंतज़ार की एक बहुत ही खूबसूरत तस्वीर है।
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