मुझ को तो सिखा दी है अफ़रंग ने ज़िंदीक़ी — अल्लामा इक़बाल
मुझ को तो सिखा दी है अफ़रंग ने ज़िंदीक़ी
इस दौर के मुल्ला हैं क्यूँ नंग-ए-मुसलमानी
“The foreign world has taught me the ways of life; Why are the scholars of Islam so devoid of dignity?”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
मुझे तो अफ़रंग ने ज़िंदगी जीना सिखा दी है; इस दौर के मुल्ला क्यों नंग-ए-मुस्लमानी हैं।
विस्तार
यह शेर आज के दौर की एक बहुत गहरी सामाजिक टिप्पणी है। शायर कहते हैं कि ज़िंदगी की समझ उन्हें पश्चिम (अफ़रंग) ने दी है... और इस वजह से उन्हें इस दौर के मुल्लाओं पर शक होता है। वो सवाल करते हैं कि ये धर्मगुरु इतने खुले, इतने बेबस क्यों हैं? यह शे'र दिखावटी धार्मिकता और आधुनिक सोच के टकराव को बहुत खूबसूरती से बयां करता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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