हुआ न ज़ोर से उस के कोई गरेबाँ चाक — अल्लामा इक़बाल

हुआ न ज़ोर से उस के कोई गरेबाँ चाक अगरचे मग़रबियों का जुनूँ भी था चालाक

“No great effort was required from him, though the passion of the Maghribis was cunning.”

— अल्लामा इक़बाल

अर्थ

उससे ज़ोर लगाने की ज़रूरत नहीं पड़ी, भले ही मग़रिबी लोगों का जुनून चालाक था।

विस्तार

यह शेर एक बहुत गहरी बात कहता है, कि कुछ चीज़ें इतनी मज़बूत होती हैं कि उन्हें कोई भी ताकत या चालाकी हरा नहीं सकती। शायर कहते हैं कि चाहे दुनिया की कोई भी सभ्यता या जुनून क्यों न हो, वह व्यक्ति का आंतरिक बल... उसे कभी झुका नहीं सकता। यह अपनी पहचान और मज़बूती पर अटूट विश्वास का बयान है।

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