रहे न 'ऐबक' ओ 'ग़ौरी' के मारके बाक़ी हमेशा ताज़ा ओ शीरीं है नग़्मा-ए-'ख़ुसरौ'

“Oh 'Aibak', oh 'Gauri', nothing remains after you strike, the melody of 'Khusrau' is always fresh and sweet.”

— अल्लामा इक़बाल
अर्थ

ऐबक और गौरी के वार के बाद कुछ भी बाकी नहीं रहता, खूसरौ का नग़मा हमेशा ताज़ा और मीठा होता है।

विस्तार

यह शेर कला और भावनाओं की अमरता को दर्शाता है। शायर कहते हैं कि भले ही 'ऐबक' और 'गौरी' का साथ छूट जाए, लेकिन 'ख़ुसरौ' का नग़मा हमेशा ताज़ा और मीठा रहेगा। यह एक गहरा संदेश है कि सच्ची सुंदरता, चाहे वह कला में हो या यादों में, हमेशा जीवित रहती है।

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