हैं उक़्दा-कुशा ये ख़ार-ए-सहरा — अल्लामा इक़बाल

हैं उक़्दा-कुशा ये ख़ार-ए-सहरा कम कर गिला-ए-बरहना-पाई

“These knots and thorny bushes of the desert, Lessen the complaints of the naked-footed one.”

— अल्लामा इक़बाल

अर्थ

ये उक़्दा-कुशा ये ख़ार-ए-सहरा हैं, कम कर गिला-ए-बरहना-पाई।

विस्तार

यह शेर हमें ज़िंदगी की मुश्किलों से जूझने का हौसला देता है। शायर कहते हैं कि ये काँटे भरे रास्ते (ख़ार-ए-सहरा) भी उलझनें सुलझाने वाले होते हैं। इसलिए, ज़मीन पर पैरों के निशान देखकर शिकायत करना छोड़ दो। मतलब यह है कि हमें हर दर्द, हर संघर्ष को स्वीकार करना चाहिए, क्योंकि वही हमें ज़िंदगी की बड़ी उलझनों से बाहर निकालेंगे।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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