राई ज़ोर-ए-ख़ुदी से पर्बत
पर्बत ज़ोफ़-ए-ख़ुदी से राई
“The mustard seed from the strength of its own being elevates the mountain, And the mountain from the grace of its own being elevates the mustard seed.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
राई अपनी आंतरिक शक्ति से पर्वत को ऊँचा करती है, और पर्वत अपनी आंतरिक कृपा से राई को ऊँचा करता है।
विस्तार
यह शेर 'ज़ोर-ए-ख़ुदी' के विचार को समझाता है, यानी आत्मशक्ति। अल्लामा इकबाल कहते हैं कि जीवन में हर चीज़ जुड़ी हुई है। जैसे पहाड़ (पर्बत) 'राई' से बना है, और 'राई' भी पहाड़ की ज़ुल्फ़ (बालों) से बनी है—यह दर्शाता है कि आत्म का सार हर चीज़ में मौजूद है। यह एक गहरा दार्शनिक संदेश है कि हर कण में खुद की पहचान है!
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