या मिरी आह में ही कोई शरर ज़िंदा नहीं — अल्लामा इक़बाल

या मिरी आह में ही कोई शरर ज़िंदा नहीं या ज़रा नम अभी तेरे ख़स-ओ-ख़ाशाक में है

“In this sigh of mine, no mischief remains alive, Yet, just a little moisture still lingers in your moist folds.”

— अल्लामा इक़बाल

अर्थ

मेरी इस आह में कोई शरारत बाकी नहीं है, पर तेरे खस-ओ-खाशाक में अभी भी थोड़ा नमपन बाकी है।

विस्तार

यह शेर बहुत गहरा है। शायर कहते हैं कि मेरी आहों में तो अब कोई जान बाकी नहीं है, मेरा दिल थक चुका है। लेकिन... जब वो कहते हैं कि तेरे ख़स-ओ-ख़ाशाक में अभी नमी है, तो वो क्या कह रहे हैं? वो कह रहे हैं कि मेरी थकान के बावजूद, तेरी यादों का असर, तेरी मोहब्बत का एहसास, अभी भी ज़िंदा है। ये दर्द है, पर एक मीठा दर्द!

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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