दिल हो ग़ुलाम-ए-ख़िरद या कि इमाम-ए-ख़िरद
सालिक-ए-रह होशियार सख़्त है ये मरहला
“Oh, whether the heart is a slave to desire, or a wise guide, This stage of life is harsh for the seeker of the path.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
दिल हो ग़ुलाम-ए-ख़िरद या कि इमाम-ए-ख़िरद, स़ालिक-ए-रह होशियार सख़्त है ये मरहला। (अर्थात, चाहे मन वासना का दास हो या ज्ञान का मार्गदर्शक, इस जीवन के पड़ाव पर सजग रहना कठिन है।)
विस्तार
यह शेर हमें जीवन के एक बहुत गहरे सत्य की याद दिलाता है। शायर कहते हैं कि दिल को अपनी भावनाओं में बहने देने के बजाय, उसे समझदारी (ख़िरद) का गुलाम होना चाहिए। और जो इस रास्ते पर चल रहा है, उसे बहुत सावधान रहना होगा। क्योंकि ये जो जीवन का पड़ाव है, ये बहुत कठिन है। हमें हर कदम पर होशमंद रहना होगा।
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