तेरी तबीअत है और तेरा ज़माना है और
तेरे मुआफ़िक़ नहीं ख़ानक़ही सिलसिला
“Your nature is such, and your time is such, that No lineage in the khanqah can match you.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
तेरी तबीअत ऐसी है और तेरा ज़माना भी ऐसा है कि खानक़ाह का कोई भी सिलसिला तुझसे मेल नहीं खा सकता।
विस्तार
यह शेर महबूब की अफ़रोत और उनकी शान-ओ-शौकत को बयान करता है। शायर कहते हैं कि महबूब का मिज़ाज और उनका ज़माना इतना ऊंचा है कि यहाँ की शायरी की परंपरा (ख़ानक़े का सिलसिला) उनके बराबर नहीं आ सकती। यह महबूब की अद्वितीय और बेमिसाल क़द्र का इज़हार है!
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