वो ख़ाक कि है जिस का जुनूँ सयक़ल-ए-इदराक — अल्लामा इक़बाल
“That dust which holds the passion of realization, That dust which is from which Gabriel's garment was woven.”
अर्थ
वह धूल, जिसका जुनून (या मोह) ज्ञान की प्राप्ति से जुड़ा है, और वह धूल जिससे जिब्रील का चोगा बना था।
विस्तार
यह शेर अल्लामा इकबाल साहब की गहन सोच को दर्शाता है, जो इबादत और हकीकत के बीच के अंतर को समझाता है। शायर दो तरह की 'ख़ाक' की बात कर रहे हैं। एक ख़ाक जुनून-ए-इदराक से जुड़ी है, यानी ज्ञान की तीव्र प्यास। दूसरी ख़ाक जिब्रील के क़बा से है। इसका मतलब है कि असली समर्पण केवल जुनून नहीं, बल्कि उस दिव्य स्रोत से आता है जहाँ से ज्ञान का आगमन होता है।
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