फ़ितरत ने न बख़्शा मुझे अंदेशा-ए-चालाक — अल्लामा इक़बाल

फ़ितरत ने न बख़्शा मुझे अंदेशा-ए-चालाक रखती है मगर ताक़त-ए-परवाज़ मिरी ख़ाक

“Nature has not granted me the foresight of cunning, But it holds my strength of flight within its dust.”

— अल्लामा इक़बाल

अर्थ

प्रकृति ने मुझे चालाक होने का अनुमान नहीं दिया, पर वह मेरी उड़ान की ताकत को अपने धूल में रखती है।

विस्तार

यह शेर हमारी अंदरूनी हकीकत और हमारी छिपी हुई ताक़त के बारे में है। शायर कह रहे हैं कि फ़ितरत ने उन्हें चालाकी का डर नहीं दिया, यानी वो सादे हैं। लेकिन फिर भी, उनके अंदर एक ऐसी ताक़त है जो कभी खत्म नहीं होगी—परवाज़ की ताक़त, जो राख में भी ज़िंदा है! यह एक गहरे आत्मविश्वास और अडिग हौसले का इज़हार है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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