फ़ितरत को ख़िरद के रू-ब-रू कर — अल्लामा इक़बाल

फ़ितरत को ख़िरद के रू-ब-रू कर तस्ख़ीर-ए-मक़ाम-ए-रंग-ओ-बू कर

“Opposite your nature, through the purchase of wealth, Subdue the station of color and fragrance.”

— अल्लामा इक़बाल

अर्थ

अपनी प्रकृति के विपरीत जाकर, धन की खरीद से रंग और सुगंध के स्थान को वश में करो।

विस्तार

यह शेर हमें सिर्फ़ दौलत की बात नहीं करता, बल्कि आत्म-संयम और बुद्धि की बात करता है। शायर कह रहे हैं कि अपनी फ़ितरत, अपनी अंदरूनी इच्छाओं का सामना अपनी ख़िरद, अपनी समझदारी से करो। असली जीत तो उन नश्वर चीज़ों पर होती है—जो रंग और खुशबू की तरह पल भर में मिट जाती हैं। यह ज़िंदगी का सबसे बड़ा फ़लसफ़ा है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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