“O Saqi, this patch of barren land is not without hope, If it gets a little moisture, this soil is very fertile.”
ना-उमीद 'इक़बाल' अपनी किश्त-ए-वीराँ से, ज़रा नम हो तो ये मिट्टी बहुत ज़रख़ेज़ है साक़ी। (अर्थात, 'इक़बाल', अपनी बंजर ज़मीन से नाउम्मीद मत हो, क्योंकि अगर इसे थोड़ा पानी मिल जाए तो यह मिट्टी बहुत उपजाऊ है, हे साक़ी।)
यह शेर सिर्फ एक शिकायत नहीं है, बल्कि एक गहरा विश्वास है। शायर यहाँ साक़ी से कह रहे हैं कि मेरे हाल को देखकर निराश मत होना। मेरी हालत भले ही वीरान हो, लेकिन ये ज़मीन बहुत उपजाऊ है। बस इसे थोड़ा सा पानी, थोड़ा सा सहारा चाहिए... और यह मिट्टी अपने आप खिल उठेगी। यह पूरी तरह से अपनी आंतरिक शक्ति पर भरोसा करने का संदेश है।
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