पीर-ए-हरम ने कहा सुन के मेरी रूएदाद
पुख़्ता है तेरी फ़ुग़ाँ अब न इसे दिल में थाम
“The Pir-e-Haram said, hearing of my sorrowful plight, 'Your lament is strong; do not hold it in your heart.'”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
पीर-ए-हरम ने मेरी उदासी सुनकर कहा, 'तेरा विलाप बहुत प्रबल है; इसे अब दिल में मत सँजो।'
विस्तार
यह शेर हमें भावनात्मक मुक्ति का गहरा संदेश देता है। यहाँ पीर-ए-हरम ने शायर को सलाह दी है कि आपकी पीड़ा और उदासी इतनी गहरी हो चुकी है, कि अब इसे दिल में दबाए रखना ठीक नहीं है। यह हमें सिखाता है कि दर्द को स्वीकार करना और उसे बाहर निकालना ही सच्ची शांति की राह है।
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