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ठहर सका हवा-ए-चमन में ख़ेमा-ए-गुल यही है फ़स्ल-ए-बहारी यही है बाद-ए-मुराद

The tent of flowers could not be stopped by the spring breeze, This is the season of spring, this is the wind of desire.

अल्लामा इक़बाल
अर्थ

फूलों का तंबू हवा में टिक नहीं सका, यह बसंत का मौसम है, यह इच्छा की हवा है।

विस्तार

इस शेर में, शायर हमें ज़िंदगी की नश्वरता और खूबसूरती का संगम दिखा रहे हैं। गुलाबों का तंबू (जो कि खूबसूरती या खुशी का प्रतीक है) हवा के झोंके से ठहर नहीं सकता। क्यों? क्योंकि ये 'फ़स्ल-ए-बहारी' ही है, ये 'बाद-ए-मुराद' ही है। शायर कह रहे हैं कि जीवन की सबसे खूबसूरत चीजें, सबसे प्यारी चीज़ें... वो ठहराव के लिए नहीं बनीं। वो तो बस बहने के लिए बनी हैं!

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