असर करे न करे सुन तो ले मिरी फ़रियाद
नहीं है दाद का तालिब ये बंदा-ए-आज़ाद
“Whether you heed or ignore, listen to my plea, I am a free man, not one who seeks favor or plea.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
चाहे आप ध्यान दें या न दें, मेरी पुकार सुन लीजिए। मैं आज़ाद इंसान हूँ, जो किसी का एहसान या favor चाहता नहीं।
विस्तार
यह शेर आत्म-सम्मान और आज़ादी का एक गहरा इज़हार है। शायर कह रहे हैं कि मेरा वजूद, मेरी क़ीमत, किसी की तारीफ़ या मेहरबानी पर निर्भर नहीं करती। चाहे आप मेरी बात मानें या न मानें, मेरी फ़रियाद तो सुन लीजिए। यह एक बहुत बड़ी हिम्मत है.... क्योंकि यह अहसास दिलाता है कि जब आप किसी पर निर्भर नहीं होते, तो आप सचमुच आज़ाद होते हैं।
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