ना-सुबूरी है ज़िंदगी दिल की आह वो दिल कि ना-सुबूर नहीं

“Life's heart has no patience, oh, that heart is not impatient.”

— अल्लामा इक़बाल
अर्थ

ज़िंदगी दिल की ना-सुबूरी है, आह वो दिल कि ना-सुबूर नहीं। (अर्थात, ज़िंदगी के दिल में बेचैनी है, वह दिल अधीर नहीं है।)

विस्तार

यह शेर इंसान के दिल की उस बेचैनी और बेचैन स्वभाव को बयां करता है। शायर कहते हैं कि ज़िंदगी में ना-सुबूरी ही है, ये दिल की निशानी है। यानी, हमारा दिल हमेशा एक ठहराव नहीं चाहता, हमेशा कुछ चाहता रहता है। यह एक गहरा एहसास है कि ज़िंदगी का मतलब ही इस बेचैनी में है!

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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