दिल-ए-बीना भी कर ख़ुदा से तलब
आँख का नूर दिल का नूर नहीं
“Even the heart without sight should seek favor from God; the brilliance of the eye is not the brilliance of the heart.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
बिना आँखों वाले दिल को भी खुदा से दुआ मांगनी चाहिए; आँख की चमक दिल की चमक नहीं होती।
विस्तार
यह शेर बहुत गहरा है। शायर यहां हमें बता रहे हैं कि बाहरी रूप-रंग या आँखों की चमक से कोई इंसान कभी पूरी तरह से रोशन नहीं हो सकता। असली रोशनी तो दिल में होती है। अगर हमारा दिल अभी बेख़बर है, तो भी हमें ख़ुदा से उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए। यह दिल और आँख के नूर का अंतर हमें इंसानियत सिखाता है।
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