वो शब-ए-दर्द-ओ-सोज़-ओ-ग़म कहते हैं ज़िंदगी जिसे
उस की सहर है तू कि मैं उस की अज़ाँ है तू कि मैं
“They call life the night of pain, burning, and sorrow, but you are its dawn, and I am its call to prayer.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
जिसे लोग ज़िंदगी कहते हैं, वह असल में दर्द और ग़म की एक रात है। कवि पूछता है कि उस रात की सुबह तुम हो या मैं, और उसकी अज़ान कौन है?
विस्तार
यह शेर ज़िंदगी की उलझन को बहुत खूबसूरती से बयां करता है। शायर कहते हैं कि ज़िंदगी एक दर्द भरी रात जैसी है, जो सोज़ और ग़म से भरी है। लेकिन फिर वो बताते हैं कि इस अंधेरे में, महबूब की सूरत सुबह की पहली किरण है, और उनका इश्क़ उस सुबह को जगाने वाली अज़ान है। मतलब, आप सिर्फ़ प्यार नहीं, बल्कि मेरी रूह की इबादत हैं!
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