बेताब है कमाल हमारा दिल-ए-हज़ीं — ख़्वाजा हैदर अली आतिश

बेताब है कमाल हमारा दिल-ए-हज़ीं मेहमान सरा-ए-जिस्म का होगा रवाना क्या

“Restless beyond measure is our sorrowful heart; this guest of the body's inn—when will it depart?”

— ख़्वाजा हैदर अली आतिश

अर्थ

हमारा दुखी दिल हद से ज़्यादा बेचैन है; यह शरीर रूपी सराय का मेहमान न जाने कब कूच कर जाएगा।

विस्तार

शायर अपने उदास और बेचैन दिल की बात करता है। यह दिल इतना बेताब हो गया है कि लगता है जैसे अब यह विदा होने वाला है। वह शरीर को एक मेहमानख़ाने की तरह देखता है, एक अस्थायी ठिकाना, और दिल को उसमें ठहरा हुआ एक मुसाफ़िर मानता है। अब वह मेहमान जाने को तैयार लगता है, मानो जीवन का सफ़र अपने अंत के पास हो। इसमें एक कोमल उदासी है, यह एहसास कि आत्मा सचमुच इस शरीर की नहीं, बस कुछ समय के लिए यहाँ से गुज़र रही है। यह शेर धीरे से याद दिलाता है कि हमारा यह दुनियावी ठहराव कितना क्षणभंगुर है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठUnavailable
हिंदी अर्थUnavailable
अंग्रेज़ी अर्थUnavailable
हिंदी विस्तारUnavailable
अंग्रेज़ी विस्तारUnavailable
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.