सय्याद गुलज़ार दिखाता है सैर-ए-बाग़ — ख़्वाजा हैदर अली आतिश
“The hunter shows the garden's charm, a stroll through blooms so fair— yet in its cage, why would the nightingale recall its nest with care?”
अर्थ
शिकारी बाग़ की सैर और उसकी रौनक़ दिखाता है, मगर पिंजरे में क़ैद बुलबुल अपने घोंसले को भला क्यों याद करे?
विस्तार
ज़रा सोचिए, शिकारी एक ख़ूबसूरत बाग़ दिखा रहा है, उसके खिले फूल और सुंदर रास्ते गिना रहा है। मगर दर्द यह है कि बुलबुल पिंजरे में क़ैद है। जब उसकी अपनी आज़ादी और अपना घोंसला ही छिन गया, तो वह इस बाग़ की सैर का आनंद कैसे ले? चाहे चारों ओर कितनी ही रौनक़ हो, क़ैद दिल को बस अपने घर की याद सताती है। यह शेर धीरे से याद दिलाता है कि जिसने अपनी आज़ादी खो दी, उसके लिए दूसरों की शानो-शौकत बेमानी है। सच्चा सुकून अपनेपन में है, अपने छोटे से आशियाने में, न कि पिंजरे की सलाखों से दिखाए गए किसी बड़े बाग़ में।
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