फ़िराक़-अंजाम काम आग़ाज़-ए-वस्लत का बिला-शक है — ख़्वाजा हैदर अली आतिश
“The work of union's dawn ends surely in the pain of parting's night; I wept so much when I found soul and body yearning for each other's sight.”
अर्थ
विसाल की शुरुआत का अंजाम बेशक जुदाई ही है; मैं बहुत रोया जब मैंने अपनी रूह और तन को एक-दूसरे के लिए तड़पता हुआ पाया।
विस्तार
यह शेर प्रेम की एक मीठी-कड़वी सच्चाई कहता है। कवि कहता है कि मिलन की शुरुआत का अंत अक्सर जुदाई में ही होता है। इसमें कोई शक नहीं, क्योंकि जिस पल दो आत्माएँ मिलती हैं, उसी पल बिछड़ने का बीज चुपचाप बो दिया जाता है। दूसरी पंक्ति बहुत भावुक है। कवि बहुत रोता है जब उसे एहसास होता है कि उसकी रूह और उसका तन, दोनों एक ही महबूब के लिए तरस रहे हैं, बराबर की चाह के साथ। यह उस दर्द की बात है कि सबसे मीठी नज़दीकी पर भी दूरी का साया है। ये आँसू सिर्फ़ चाहत से नहीं, बल्कि इस समझ से आते हैं कि साथ कितना नाज़ुक और क्षणिक है।
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