मिला न सर्व को कुछ अपनी रास्ती में फल — ख़्वाजा हैदर अली आतिश

मिला न सर्व को कुछ अपनी रास्ती में फल कुलाह-ए-कज जो न करता तो लाला क्या करता

“Not everyone found fruit upon his chosen way; If the tulip wore not its tilted crown, what else could it do?”

— ख़्वाजा हैदर अली आतिश

अर्थ

सीधे खड़े रहने वाले सर्व को अपनी सीधाई का कोई फल नहीं मिला; अगर लाला अपनी टेढ़ी टोपी न पहनता तो और क्या करता।

विस्तार

यह शेर प्रकृति की दो तस्वीरों से खेलता है। सर्व यानी सनोबर का पेड़ सीधा और ऊँचा खड़ा रहता है, पर अपनी इसी सीधाई के बावजूद वह कोई फल नहीं देता। दूसरी ओर लाला यानी गुलाले का फूल अपनी पंखुड़ी को टेढ़ी टोपी की तरह पहनता है, थोड़ा झुका और तिरछा, और इसी टेढ़ेपन की वजह से वह लाल और सुंदर खिलता है। शायर नरमी से कहता है कि हमेशा कठोर सीधाई इनाम नहीं देती। कभी थोड़ा झुकाव, थोड़ा जोश और अंदाज़ ही जीवन में रंग भरता है। लाला और कर भी क्या सकता था, सिवाय अपनी टोपी तिरछी रखने के? यही तिरछापन उसकी शान का राज़ है।

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