वो शोख़ निहाँ गंज के मानिंद हो इसमें — ख़्वाजा हैदर अली आतिश
“That playful one lies hidden within it, like a buried treasure; The flourishing city of this world is but His desolate ruin.”
अर्थ
वह शोख़ महबूब इसमें छुपे ख़ज़ाने की तरह पोशीदा है; दुनिया की यह आबाद बस्ती दरअसल उसी के वीराने जैसी है।
विस्तार
शायर कल्पना करते हैं कि वह शोख़ और चंचल महबूब इस दुनिया में किसी छिपे हुए ख़ज़ाने की तरह पोशीदा है। जैसे ख़ज़ाने अक्सर वीरानों और उजड़ी जगहों के नीचे मिलते हैं, वैसे ही यह भरी-पूरी, आबाद दुनिया उस छिपे हुए हुस्न के लिए महज़ एक वीराना है। कहने का मतलब यह कि यह रौनक़ भरी दुनिया, अपनी सारी चहल-पहल के साथ, बस ऊपरी खोल है, उजड़ी हुई सतह है, जबकि असली ख़ज़ाना, यानी महबूब, उसके भीतर गहराई में छिपा है। यहाँ एक कोमल हैरानी है कि जो बाहर से भव्य और आबाद दिखता है, वह सिर्फ़ परदा है, और असली क़ीमत भीतर छिपी रहती है।
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