शुक्राना साक़ी-ए-अज़ल करता हो आतिश — ख़्वाजा हैदर अली आतिश
“Let Aatish give thanks to the eternal cup-bearer, that his goblet brims over with the wine of longing.”
अर्थ
आतिश अज़ल के साक़ी का शुक्रिया अदा करे कि उसका पैमाना शौक़ की मय से लबरेज़ है।
विस्तार
इस शेर में शायर आतिश शुक्र की बात करते हैं। वे उस अनादि साक़ी की कल्पना करते हैं, जो सृष्टि के आरंभ से ही जीवन का प्याला भरता आया है। शायर चाहते हैं कि उसका अपना प्याला हमेशा लबालब भरा रहे, पर साधारण शराब से नहीं, बल्कि चाह और इश्क़ की मदिरा से। यह एक कोमल सी कामना है। वे उस दाता का शुक्रिया अदा करते रहना चाहते हैं, और बदले में बस इतना मांगते हैं कि उनका दिल हमेशा जोश और तड़प से भरा रहे। सीधे शब्दों में, वे कह रहे हैं कि मेरी रूह प्रेम और लगन से छलकती रहे, और मैं इस जीवन के उपहार के लिए सदा आभारी रहूं।
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