हुबाब-आसा मैं दम भरता हूँ तेरी आश्नाई का — ख़्वाजा हैदर अली आतिश

हुबाब-आसा मैं दम भरता हूँ तेरी आश्नाई का निहायत ग़म है इस क़तरे को दरिया की जुदाई का

“Like a bubble, I draw each breath in witness of my bond with you; boundless is this droplet's grief at being parted from the sea.”

— ख़्वाजा हैदर अली आतिश

अर्थ

बुलबुले की तरह मैं तेरी दोस्ती का दम भरता हूँ; इस बूँद को दरिया से जुदा होने का बहुत ग़म है।

विस्तार

ज़रा सोचिए, पानी पर तैरता एक बुलबुला। शायर कहता है कि उसी बुलबुले की तरह मैं तुम्हारी दोस्ती और नज़दीकी का दम भरता हूँ, दावा करता हूँ कि हमारा रिश्ता गहरा है। मगर बुलबुला पल भर में फूटकर मिट जाता है। इसी में छिपा है असली ग़म: जैसे एक बूँद दरिया से बिछड़ जाए, वैसे ही मुझे अपने महबूब से जुदाई का गहरा दुख है। शायर मानता है कि यह नाता कितना नाज़ुक और क्षणभंगुर है। वह चाहता है कि किसी बड़े में समा जाए, फिर से मिल जाए, पर अकेला रह जाता है। यह गर्व और टूटे दिल, दोनों का कोमल इक़रार है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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