जल्द नहला मुझको मेरे ख़ून से ऐ शमशीर-ए-यार — ख़्वाजा हैदर अली आतिश
“Bathe me swiftly in my own blood, O beloved's sword, for years the skirt of my heart has been stained with the soil of sin.”
अर्थ
ऐ प्रिय की तलवार, मुझे जल्दी से मेरे अपने ख़ून से नहला दे, क्योंकि बरसों से मेरे दिल का दामन गुनाहों की मैल से सना हुआ है।
विस्तार
शायर महबूब की तलवार को दोस्त की तरह पुकारता है और कहता है, मुझे जल्दी मेरे अपने ख़ून से नहला दो। वह महसूस करता है कि सालों से उसके दिल का दामन गुनाहों और ख़ताओं से दागदार हो गया है। उसे लगता है कि सिर्फ़ महबूब की तलवार ही उसे पाक-साफ़ कर सकती है। यहाँ एक प्यारा समर्पण है, इस आख़िरी और मुहब्बत भरे वार से पाक होने की चाहत। बरसों से गुनाह का बोझ उससे लिपटा रहा, और अब वह इस छुटकारे का स्वागत करता है। यह भक्ति और तौबा का सुंदर मेल है, जहाँ महबूब के हाथों मौत डर नहीं, बल्कि पाकीज़गी बन जाती है।
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