Sukhan AI
घिसते घिसते मिट जाता आप ने अबस बदला
नंग-ए-सज्दा से मेरे संग-ए-आस्ताँ अपना

It would have worn away from constant friction,You changed your threshold's stone in vain.From the disgrace of my prostrations' conviction,You sought to remove its persistent stain.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

आपके चौखट का पत्थर मेरे निरंतर सजदों से घिसते-घिसते मिट जाता। आपने उसे मेरे सजदों की शर्मिंदगी से बचने के लिए व्यर्थ ही बदल दिया।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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