ब-ज़ाहिदाँ रग-ए-गर्दन है रिश्ता-ए-ज़ुन्नार — मिर्ज़ा ग़ालिब
ब-ज़ाहिदाँ रग-ए-गर्दन है रिश्ता-ए-ज़ुन्नार
सर-ए-ब-पा-ए-बुत-ए-ना-निहादा रखते हैं
“For ascetics, the jugular vein is their sacred thread; We lay our heads at the feet of idols not yet made.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
तपस्वियों के लिए गर्दन की नस उनका जनेऊ है। हम अपने सिर उन मूर्तियों के चरणों में रखते हैं जो अभी तक बनी नहीं हैं।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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