“In this ordeal, Asad, one finds no relish of delight— / Though a strong kinship with wine is borne by the salt of izara.”
ऐ असद, इस अमल में ऐश और आनंद का कोई मज़ा नहीं मिलता, यद्यपि अज़ारा के नमक का शराब से बहुत गहरा संबंध है।
ग़ालिब यहाँ एक दिलचस्प बात कह रहे हैं कि इस मुश्किल अमल या मशक़्क़त में ज़िंदगी का कोई सुख और मज़ा नहीं मिलता। शराब से ताल्लुक़ रखने वाला नमक भले ही अपनी नस्ल में मय से जुड़ा हो, मगर वह सरूर और नशा देने के बजाय सिर्फ़ खारापन और तकलीफ़ देता है। इसका गहरा इशारा ऐसे जुनून और आज़माइशों की तरफ़ है, जो बजाहिर मोहब्बत की तरह गहरी तो होती हैं लेकिन उनमें सुकून का कोई नाम-ओ-निशान नहीं होता।
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