गर्द-ए-राह-ए-यार है सामान-ए-नाज़-ए-ज़ख़्म-ए-दिल वर्ना होता है जहाँ में किस क़दर पैदा नमक

“The dust of the beloved's path is the proud adornment of the wounded heart; otherwise, how much salt could this world ever produce?”

— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

महबूब के रास्ते की धूल ही दिल के ज़ख़्म के लिए नाज़ और नमक का सामान है, वरना इस दुनिया में इतना नमक कहाँ पैदा होता है।

विस्तार

ग़ालिब यहाँ 'ज़ख़्मों पर नमक छिड़कने' के मुहावरे को एक बेहद ख़ूबसूरत अंदाज़ में ढालते हैं। वे कहते हैं कि महबूब के रास्ते की धूल ही उनके दिल के ज़ख़्मों का नाज़ और शृंगार है, जो नमक बनकर उनके दर्द को ताज़ा रखती है। अगर यह ख़ास धूल न होती, तो भला दुनिया में इतना नमक कहाँ से आता जो आशिक़ के इन बेशुमार ज़ख़्मों को सींच सके? इस तरह वे महबूब से मिलने वाली पीड़ा को भी किसी अनमोल तोहफ़े की तरह संजोते हैं।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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