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रग-ए-संग से टपकता वो लहू कि फिर थमता जिसे ग़म समझ रहे हो ये अगर शरार होता

From veins of stone, that blood would ceaseless flow,Which would not stop, if what you deem as grief, a mere spark were to glow.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

पत्थर की रगों से वह लहू टपकता जो फिर कभी न रुकता, जिसे तुम ग़म समझ रहे हो अगर वह चिंगारी होता।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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