मिटता है फ़ौत-ए-फ़ुर्सत-ए-हस्ती का ग़म कोई — मिर्ज़ा ग़ालिब

मिटता है फ़ौत-ए-फ़ुर्सत-ए-हस्ती का ग़म कोई उम्र-ए-अज़ीज़ सर्फ़-ए-इबादत ही क्यूँ न हो

“Does the sorrow for the lost opportunity of existence ever vanish,Even if one's precious life is spent entirely in worship?”

— मिर्ज़ा ग़ालिब

अर्थ

हस्ती के अवसर खो देने का दुख कभी नहीं मिटता, भले ही इंसान अपनी कीमती ज़िंदगी इबादत में ही क्यों न गुज़ार दे। जीवन के छूटे हुए मौकों का अफ़सोस केवल पूजा-पाठ से दूर नहीं होता।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठ
हिंदी अर्थ
अंग्रेज़ी अर्थ
हिंदी विस्तार
अंग्रेज़ी विस्तार
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.